पुत्र मोह
बहू-बेटो ने दुखीबबा का जीवन नरक कर दिया था . दी दिनों से मरन्शैया पर पड़े हुए थे . दुखिबबा कराहते हुए बड़े बेटे गोपाल से विनती भरे स्वर में बोले बेटा जमींदार जगदीश बाबू को बुला देता. मुलाकात की बड़ी इच्छा है .
गोपाल -डपट दिया .
दुखिबबा गाँव के एक लडके जीतेन्द्र को भेजकर जमीदार जगदीश बाबूओ को बुलवाए. दुखिबबा ने जगदीश को पास बैठाने का इशारा किया और उखड़ती सांस में बोले बाबू मै तो जा रहा हूँ. मेरे बच्चो पर दया-दृष्टि बनाये रखना और दुखिबबा की सांस सदा के लिए थम गयी.
गोपाल अवाक था पिता के अंतिम क्षण के पुत्र मोह को देखकर .
नन्द लाल भारती
Thursday, December 2, 2010
munh dikhayee
मुंह DIKHAYEE ..
दीक्षा अपनी जेठानी प्रतीक्षा से -दीदी अशोक की मम्मी कह रही थी की तुमने तो हमारी बहू को मुंह दिखाई नहीं दी . मै तुम्हारी बहू को क्या दूँगी.
प्रतीक्षा-तुमने क्या जबाब दिया .
दीक्षा-दीदी ने तो दिया है .
प्रतीक्षा-तब क्या कहा सुभौता दीदी ने .
दीक्षा-वे बोली तुम्हारी जेठानी ने दिया है, तुमने तो नहीं.
प्रतीक्षा- बाप रे कैसी कैसी साजिशे रचती है सुभौता दीदी, तुमको कहना था दीदी मत बाँटो हमें. मत देना हमारी बहूओ को ... नन्दलाल भारती
दीक्षा अपनी जेठानी प्रतीक्षा से -दीदी अशोक की मम्मी कह रही थी की तुमने तो हमारी बहू को मुंह दिखाई नहीं दी . मै तुम्हारी बहू को क्या दूँगी.
प्रतीक्षा-तुमने क्या जबाब दिया .
दीक्षा-दीदी ने तो दिया है .
प्रतीक्षा-तब क्या कहा सुभौता दीदी ने .
दीक्षा-वे बोली तुम्हारी जेठानी ने दिया है, तुमने तो नहीं.
प्रतीक्षा- बाप रे कैसी कैसी साजिशे रचती है सुभौता दीदी, तुमको कहना था दीदी मत बाँटो हमें. मत देना हमारी बहूओ को ... नन्दलाल भारती
Wednesday, December 1, 2010
vidroh
विद्रोह .
बगावती -काकी सास दमयंती के सामने थाली पटकते हुए बोली भैंस का चारा-पानी मै कर रही हूँ और दूध पुष्पा पी रही है. अम्मा ये बेगानापन क्यों .
दमयंती-बीटिया तू नहीं जानती क्या पुष्पा के पेट में जानलेवा दर्द हो रहा है. डाक्टर ने पंद्रह दिन तक खाना देने को मन किया है. बेटी तू ही बता कैसे रहेगी जिंदा बिना खाए-पीये. कुछ तो चाहिए ना ....
बगावती ..सगी पतोहू को दूध पिला रही हो मुझे सूखी रोटी ...
दमयंती..बेटी तेरे पति को अपना दूध पिलाकर पला तो क्या तुझे सूखी रोटी दे सकती हूँ. सब तो तेरे हाथ में है ना. कभी तुमको रोका है क्या. क्यों विद्रोह पर उतर रहो हो.
बगावती विद्रोह के बिना कैसे हक़ मिलेगा इस घर में..
दमयंती.. कैसा हक़ चाहती हो बीटिया..
बगावती.. आधे का ..
दमयंती-- घर में दीवार...
बगावती- हां..
इतना सुनते ही दमयंती गिर पड़ी धडाम से बेसुध... नन्दलाल भारती
बगावती -काकी सास दमयंती के सामने थाली पटकते हुए बोली भैंस का चारा-पानी मै कर रही हूँ और दूध पुष्पा पी रही है. अम्मा ये बेगानापन क्यों .
दमयंती-बीटिया तू नहीं जानती क्या पुष्पा के पेट में जानलेवा दर्द हो रहा है. डाक्टर ने पंद्रह दिन तक खाना देने को मन किया है. बेटी तू ही बता कैसे रहेगी जिंदा बिना खाए-पीये. कुछ तो चाहिए ना ....
बगावती ..सगी पतोहू को दूध पिला रही हो मुझे सूखी रोटी ...
दमयंती..बेटी तेरे पति को अपना दूध पिलाकर पला तो क्या तुझे सूखी रोटी दे सकती हूँ. सब तो तेरे हाथ में है ना. कभी तुमको रोका है क्या. क्यों विद्रोह पर उतर रहो हो.
बगावती विद्रोह के बिना कैसे हक़ मिलेगा इस घर में..
दमयंती.. कैसा हक़ चाहती हो बीटिया..
बगावती.. आधे का ..
दमयंती-- घर में दीवार...
बगावती- हां..
इतना सुनते ही दमयंती गिर पड़ी धडाम से बेसुध... नन्दलाल भारती
Tuesday, November 30, 2010
BHASHADROHI
भाषाद्रोही..
हिंदी गंगा है, वक्तव्य सुनकर एक श्रोता प्रतिक्रिया स्वरुप बोला बकवास है .
पीछे बैठे व्यक्ति से रहा नहीं गया वह उत्तेजित स्वर में बोला अरे चुप रह भाषाद्रोही ... नन्दलाल भारती
हिंदी गंगा है, वक्तव्य सुनकर एक श्रोता प्रतिक्रिया स्वरुप बोला बकवास है .
पीछे बैठे व्यक्ति से रहा नहीं गया वह उत्तेजित स्वर में बोला अरे चुप रह भाषाद्रोही ... नन्दलाल भारती
Monday, November 29, 2010
vansh
वंश ..
मम्मी सुधार भईया के नाना तुम्हारे सामने क्यों रो रहे थे .
वंश के गम में .तीन-तीन बेटिया है बेटा एक भी नहीं .
क्या..............
हां.........
मम्मी तुम्हे और पापा को चिंता नहीं .
नहीं..................
सुधार भईया के नाना को क्यों.
मर्निकर्निका कौन ले जायेगा .
मम्मी बेटियाँ भी तो मर्निकर्निका ले जा सकती है ना.
हां... बेटी क्यों नहीं . बेटियाँ भे तो हमारी वंश है..
नन्द लाल भारती
मम्मी सुधार भईया के नाना तुम्हारे सामने क्यों रो रहे थे .
वंश के गम में .तीन-तीन बेटिया है बेटा एक भी नहीं .
क्या..............
हां.........
मम्मी तुम्हे और पापा को चिंता नहीं .
नहीं..................
सुधार भईया के नाना को क्यों.
मर्निकर्निका कौन ले जायेगा .
मम्मी बेटियाँ भी तो मर्निकर्निका ले जा सकती है ना.
हां... बेटी क्यों नहीं . बेटियाँ भे तो हमारी वंश है..
नन्द लाल भारती
Sunday, November 14, 2010
badhaee
बधाई ..
बधाई हो मोची भईया तुम तो बहुत ऊपर उठ गए .
मोची-धन्यवाद् महोदय आप कोई शब्दों के जादूगर लगते है .
हां वही समझ लीजिये . मेरा नाम सेवकदास है .
मोची-महोदय प्रसाद ग्रहण कीजिये .
सेवकदास -मेरा सौभाग्य है की महावीर जयंती के सुअवसर पर आपके हाथ से प्रसाद पा रहा हूँ .
मोची- महोदय गरीब के पास सद्भाना की दौलत के सिवाय और कुछ तो होता नहीं . मौका आने पर पेट काटकर दूसरो की मदद करने से भी गरीब पीछे नहीं हटता .
सेवकदास -आपके सेवा भाव को नमन करता हूँ.
मोची-महोय मेहनत मज़दूरी की कमाई में बरकत बरसे. दूसरे आपसे सेवाभाव सीखे. ,महावीर जयंती की बहुत-बहुत बहीया बधाईया मोची भईया कहते हुए सेवकदास गंतव्य की और चल पड़ा . उखड़े पाँव मोची भईया नेक मकसद में जुट गया . नन्दलाल भारती
बधाई हो मोची भईया तुम तो बहुत ऊपर उठ गए .
मोची-धन्यवाद् महोदय आप कोई शब्दों के जादूगर लगते है .
हां वही समझ लीजिये . मेरा नाम सेवकदास है .
मोची-महोदय प्रसाद ग्रहण कीजिये .
सेवकदास -मेरा सौभाग्य है की महावीर जयंती के सुअवसर पर आपके हाथ से प्रसाद पा रहा हूँ .
मोची- महोदय गरीब के पास सद्भाना की दौलत के सिवाय और कुछ तो होता नहीं . मौका आने पर पेट काटकर दूसरो की मदद करने से भी गरीब पीछे नहीं हटता .
सेवकदास -आपके सेवा भाव को नमन करता हूँ.
मोची-महोय मेहनत मज़दूरी की कमाई में बरकत बरसे. दूसरे आपसे सेवाभाव सीखे. ,महावीर जयंती की बहुत-बहुत बहीया बधाईया मोची भईया कहते हुए सेवकदास गंतव्य की और चल पड़ा . उखड़े पाँव मोची भईया नेक मकसद में जुट गया . नन्दलाल भारती
Wednesday, November 3, 2010
TRAINING
ट्रेनिंग ..
तुम्हारी तीन दिवसीय ट्रेनिंग होने जा रही है देवीप्रसाद कनक साहब पूछे .
देवीप्रसाद हां साहब दुछ देर पहले फैक्स से सूचना आई है .
कनक साहब -बधाई हो तुम्हारी ट्रेनिंग की . अधिकारियो की तो हुई नहीं तुम्हारी हो रही है कहते हुए कनक साहब अपने माथे पर चिंता के काले बदल लिए अपनी केबिन में चले गए .
बब्बन -देवीप्रसाद कनक साहब बधाई दे रहे थे या विरोध कर रहे थे . उखड़े पाँव कर्मचारी के नौकरी के तीसरे दशक की पहली ट्रेनिंग की .
देवीप्रसाद-कनक साहबे बड़े अफसर है . उनका अभिमान बोल रहा था .छोटे कर्मचारियों की ट्रेनिंग कनक साहब जैसे अफसर फिजूलखर्ची और कंपनी के लिए घाटे का सौदा मानते है .उखड़े पाँव छोटे कर्मचारियों की यह ट्रेनिंग छाती में शूल की तरह गड़ने लगी है .
बब्बन-कनक साहब जैसे लोगो के रहते उखड़े पाँव कर्मचारियों के पाँव नहीं जम सकते देवीप्रसाद .
नन्दलाल भारती
तुम्हारी तीन दिवसीय ट्रेनिंग होने जा रही है देवीप्रसाद कनक साहब पूछे .
देवीप्रसाद हां साहब दुछ देर पहले फैक्स से सूचना आई है .
कनक साहब -बधाई हो तुम्हारी ट्रेनिंग की . अधिकारियो की तो हुई नहीं तुम्हारी हो रही है कहते हुए कनक साहब अपने माथे पर चिंता के काले बदल लिए अपनी केबिन में चले गए .
बब्बन -देवीप्रसाद कनक साहब बधाई दे रहे थे या विरोध कर रहे थे . उखड़े पाँव कर्मचारी के नौकरी के तीसरे दशक की पहली ट्रेनिंग की .
देवीप्रसाद-कनक साहबे बड़े अफसर है . उनका अभिमान बोल रहा था .छोटे कर्मचारियों की ट्रेनिंग कनक साहब जैसे अफसर फिजूलखर्ची और कंपनी के लिए घाटे का सौदा मानते है .उखड़े पाँव छोटे कर्मचारियों की यह ट्रेनिंग छाती में शूल की तरह गड़ने लगी है .
बब्बन-कनक साहब जैसे लोगो के रहते उखड़े पाँव कर्मचारियों के पाँव नहीं जम सकते देवीप्रसाद .
नन्दलाल भारती
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