Tuesday, March 1, 2011

Dushman

Dushman ...
दुश्मन ... 
करीम-कादर आपस में  वार्तारत थे. करीम बोला-देखो वी खुमार का रघुबाबू को गली दे दिए .अफसर क्या हो गया की कंस जैसा व्यहार करने लगा .रघु तो वैसे ही नेक इंसान है, कर्म को पूजा समझते है .
कादर-वी खुमार का नैतिक,मानसिक,बौध्दिक पतन हो गया है. पागल होते जा रहा है . विभागीय काम के साथ न्याय नहीं करता है. समय के पाबन्द बेचारे रघुबाबू को बेवकूफ कामचोर, छोटेलोग और भी बुरे-बुरे शब्द बक रहा था . कैसा आदमी है .. नेम कर्मचारी को अपमानित करता है .
कादर-ऐसे लोग नेक कर्मचारियों के ही नहीं देश,संस्था और समाज के भी दुश्मन होते है .
रघुबाबू-क्या गुफ्तगू  हो  रही है  .
कादर भाई-कुछ नहीं साहेब आप जैसे कदावर लोग चलते है,  तो वी खुमार जैसे अफसर जलते है .
रघु बाबू-क्या ............................नन्दलाल भारती ०१.०३.२०११

aadesh

आदेश ...
कालबेल की घनघनाहट सुनकर चपरासी बॉस के कक्ष में प्रवेश किया .बॉस ऐनक ऊपर-नीचे करते हुए बोले क्यों विवके आ गए . 
रहीस- नहीं सर वे   ग्यारह बजे के बाद आते है .
विवेक दफ्तर में घुसते ही रहीस को चाय लाने का आदेश दिए .
रहीस- सर जी  चाय से पहले साहेब की सुन लो .
विवेक-सर आपने बुलाया है .
बॉस-तुमको अपनी औकात मालूम है. कैसे नौकरी लगी है . तुम्हारी माँ को तो मालूम होगा. कितने सफेदपोश,सफेद्कालर की चौखटों पर माथा पटकी अब जाकर नौकरी लगी, और तुम राम जी नेक,ईमानदार,वफादार कर्मचारी को औकात दिखा रहे हो . बेवक़ूफ़ कह रहे हो. ये अफासर्गिरी है या दादागिरी...
विवेक-सारी सर................
बॉस-माफी  राम से मांगो ..
राम- सर कब तक इस दादा किस्म के अफसर को माफी दू .. पहले भी कई बार दे चुका हूँ..
बॉस-एक बार और ....
राम-सर आपका आदेश ........................नन्दलाल भारती -- ०१-०३-२०११
 

Friday, February 25, 2011

NAALE KI BAADH

नाले की बाढ़ ..
देख तेरे पास चाभी होगी .
लेखा विभाग की चाभी मेरे पास ? पहले कई बार अनुरोध कर चूका हूँ की मेरे पास नहीं है . विश्वास नहीं है तो मेरे पास जो चाभिया है देख लीजिये .
बदमिजाज अफसर वफादार कर्मचारी को गाली देते हुए बोला- तेरी औकात क्या है ? अफसर से जबान लड़ता है
कर्मचारी मिस्टर विवेक आपका नाम भर विवेक है बस , वैसे है तो आप बदतमीज़ .
कर्मचारी की विवेकपूर्ण  बात से अफसर की अफसरागिरी पर जैसे वज्रपात हो गया . वह गंदे नाले में आये बाढ़ के पानी की तरह उफन  उठा . खैर नाले का उफान और मेढक की टर्र-टर्र मौसमी बरसात में तो सुनायी ही पड़ जाती है . परन्तु नाले के पाने के बहाव के सामने कोंई  माटी से जुड़ा पेड़ आ जाए तो उसे अपनी औकात का पता लग जाता है, ठीक वैसे अफसर अपनी औकात पर लजा गया था ... नन्द लाल भारती .. २५.०२.२०११ 

upaasanaa

उपासना .
डाक्टर साहेब बहुत दर्द हो रहा है .
जोड़-जोड़ में मवाद भरा है. धीरे-धीरे आराम हो जायेगा. पहले से आराम तो है न. 
जी डाक्टर है तो पर पापा मंदिर नहीं जा पा रहे है .
मंदिर जाने की फिक्र स्वास्थ्य की फ़िक्र नहीं .
मंदिर जाना भी तो जरुरी है .
क्या ख़ास -मंदिर मस्जिद में है ?
भगवान खुदा है .
ये बड़ी-बड़ी ईंट-पत्थरों की इमारते नहीं थी तो क्या भगवान नहीं थे . भगवान तो हर जगह है .भंगवान कौन से मंदिर गए थे. खुदा कौन सी मस्जिद गए थे. ईसा कौन से चर्च गए थे . मंदिर-मस्जिद के नाम पर फंसाद-बंटवारा अच्छ तो नहीं. आस्था खूब प्रज्ज्वलित करो मानवीय हित के लिए धर्मान्धता के लिए नहीं 
समझ गया डाक्टर साहेब .
क्या -----
ऐसी उपासना जो नर को परमार्थी बने थे .....
नन्द लाल भारती ..... २४.०२ २०११

kutto se saawadhaan

कुत्तो से सावधान ..
उधर देखो ज्ञानचंद .
क्या दिखा रहे हो ध्यानचंद .?
अरे उधर तो देखो गेट के सामने हट्ठे-कट्ठे बाडी गाड खड़े है . गेट पर लिखा है कुते से सावधान .
अरे भई, जन प्रतिनिधि या जन सेवक का महल है .विदेशी नस्ल के कुत्ते होगे. 
ठीक कह रहे हो बड़े लोग बड़ी -बड़ी शौके .
तभी तो देश के माथे एक और नया  कलंक मढ़ा जा रहा है . 
पुराना कौन और नया कौन सा है?
जातिवाद और अब भ्रष्टाचार का देश .
हां यार . कुत्तो से नहीं स्वार्थी -भ्रष्ट  जन प्रतिनिधियो  और जन सेवको से सावधान रहने का वक्त आ गया है .
नन्द लाल भारती २५.०२.2011

Saturday, February 19, 2011

DAR

डर
नयन क्यों उदास बैठे हो . किस चिंता में खोये हो .
डर लग रहा है अंकल .
किस बात का डर बेटा .
पापा को लेकर .
क्यों ............
पापा को नशे की आदत थी . दिन में  तीन बार गांजा  पीना तय था , इसके बिना रोटी नहीं खाते थे. जिस दिन गांजा  न मिले रोटी की थाली फेंक देते थे. पापा की लत छुड़ाने के लिए मैंने अपनी कसम दे दी पर नहीं माने. माँ गांजा  छोड़ दो कहते-कहते मर गयी.शरीर सुन्न होता जा रहा है, दीर्घशंका धोती में हो जा रही है उन्हें भान नहीं ही पाता.पापा के कल से मुझे बहुत डर लग रहा है .
बेटा -इलाज कराओ जहा तक हो सके .
अंकल इलाज चल रहा है पर फायदा तो नहीं हो रहा है .
बेटा फ़र्ज़ पूरा करो .माँ -बाप धरती के भगवान है . 
अंकल -है तो पर उनको  भी अपना फ़र्ज़ याद रखना चाहिए. मै देश के सभी बापों का पाँव पकड़ कर भीख मांगता हूँ की नशा से दूर रहे क्योंकि जिस डर में मै जी रहा हूँ उनके बच्चे उस डर के दलदल में न फंसे....
नन्दलाल भारती .. १९.०२.२०११

Thursday, February 17, 2011

GET SE BANDHA KUTTA

गेट से बंधा कुत्ता ..
साहेब ये मालिक थे क्या.
किसके मालिक .
कंपनी के .
नहीं आठवी पास बिगाड़ा हुआ ड्राइवर है.
 ऑफिस स्टाफ से तू-तू कर भौंक रहा था तो मुझे लगा भौकने वाला व्यक्ति मालिक है.
गाड़ी बंद है. काम कोइ है नहीं .उच्च-पढ़े लिखे स्टाफ से होड़,बदतमीजी और इनकी-उनकी शिकायत बस यही काम बचा है .
बड़ा गाडफादर  है क्या ...
गाडफादर बदतमीजी करने को नहीं बोलेगा . यह तो गाडफादर की तवहिनी है . सहा है तो क्या बदतमीजी करना चाहिए की इज्जत से नौकरी.
लगता है उच्च सर्व श्रेष्ठ  साबित करने का भूत सवार  है.
ठीक कह रहे है ये तो वो हाल हुई जैसे  सेठ के गेट पर बंधा डाबरमैन कुत्ता ...
नन्दलाल भारती.. १७.०२.२०११