Thursday, September 8, 2011

anshan

अनशन ....
बधाई हो मदनलाल .
जी धन्यवाद पर कैसी बधाई ?
पदोन्नति की यार .
 दोयम दर्जे के आदमी की कैसी पदोन्नति ?
 क्या .......? बड़ी-बड़ी डिग्रियों का कोइ मोल नहीं .
होता तो मानसिक प्रसव पीड़ा में जीता .
बाप रे इतना अत्याचार ?
सामंतवादी व्यवस्था का चाबुक नीचले दर्जे को क्या देगा ,शोषण उत्पीडन ,दमन और जख्म ना . यहाँ  यही मिल रहा है .
आओ चले..
कहाँ ....
अनशन पर.......नन्द लाल भारती ...३१.०८.२०११

Saturday, August 27, 2011

musibato ke samnadar

मुसीबतों के समंदर ... लघु कथा ..
 पहली बार डीपी सी में फेल कर दिया गया . साल भर बाद हुई डीपीसी से बड़ी उम्मीद थी . दूसरी बार डीपीसी देकर घर सुन्दरलाल पहुंचा तो ख़ुशी का बसंत परिवार के हर सदस्य के चहरे पर झलक रहा थी. तीसरे दिन दफ्तर से देर रात घर पहुँचते ही पत्नी और बच्चो के चहरे पर मातम पसर गया .
 पत्नी से पूछा उदासी क्यों .....?
 पत्नी बोली आप खुश हो .
 सुन्दरलाल हां में उत्तर दिया पर झूठ  कहा सच साबित हुआ है .
 वह बोली झूठी दिलासा दे रहे हैं ?
 अरे प्रमोशन नहीं हुआ तो क्या भविष्य की मौत हो गयी ? भागवान प्रमोशन अब संस्था हित में हाडफोड़ काम 
 समर्पण ,कर्तव्यनिष्ठा ,ऊंची योग्यता ,जग के मान-सम्मान को देख कर नहीं होता .
 तब कैसे  होता है ?
 बड़ी पंहुच ,ऊंची कीमत जरुरी हो योग्यता हो  गयी है. हम छोटे लोगो की ऐसी औकात कहाँ  ?
 बेटी-बेटा एक स्वर में बोले पापा चिंता ना करो .आप कैरियर के शुरुआती दिनों से मुसीबतों के समंदर में डूबते-उतिरियाते  आ रहे हैं. प्रमोशन नहीं हो रहा तो क्या . आपकी योग्यता और काम को जग सम्मान दे रहा है ना. बौद्धिक विक्षिप्त प्रमोशन नहीं दे रहे  है तो मत दे. आप चिंता मत  करो पापा.....हमें आपके स्वास्थ की चिंता हो रही है.
इतना सुनते ही  सुन्दर लाल की आँखों का  बांध टूट पड़ा और वे हिचकिया लेकर रो पड़े  ......
 नन्द लाल भारती......२८.०८.२०११

Saturday, August 20, 2011

ANNAAGIRI(SHORT STORY)


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party (short story)


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Friday, July 22, 2011

street lav

street lav.//स्ट्रीट लव//
शर्माजी कमर में हाथ होंठ पर होंठ   ये क्या हो रहा है ?
वर्माजी स्ट्रीट लव ......
क्या.........? हां स्ट्रीट लव पश्चिम से आया है  .
बाप रे अपने देश में स्ट्रीट लव. कैंसर, एड्स कम थे क्या कि  स्ट्रीट लव का रोग फैलने लगा  फास्टफूड की तरह ....नन्द लाल भारती ..२२.०७.२०११

Saturday, July 9, 2011

Chor Gali kaa aadami

Chor Gaili Kaa Aadami ...
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Wednesday, July 6, 2011

सच्चा इंसान

 सच्चा इंसान...

कौन आया है  .....?
वही जिसे बच्चो का निवाला सालों तक घर में बिठाकर खिलाया  नौकरी लगवाया .....जो किसी रिश्ते से अपना ना था और ना है  .
अच्छा सुनील .............? इंसानियत के रिश्ते से तो है   .
हां ..वही है .
सुनील मुझे नहीं पहचाना .इतना बड़ा आदमी हो गया .पद और दौलत का इतना घमंड . ना दुआ ना सलाम .जैसे धक्का मार कर गेट से  अन्दर आया  है .मै गेट पर खड़े पांच -छः लोगो से बात कर रहा था .
कैसे आया है ?
बिना किसी काम के तो आ नहीं सकता .
बचत की रकम का मामला है  .
मेरा पैसा ...?
आपका पैसा, पैसा नहीं परोपकार था .भूल जाईये .लोमड़ी खाल बदलती है आदत नहीं वैसा ही है सुनील और उसके घरवाले भी .
ठीक कह रही हो  ऐसे स्वार्थियो की वजह से परोपकारी भाव पर ग्रहण लग रहा है . मै परोपकार के भाव से मुंह नहीं मोडूंगा.
मोड़ना भी नहीं चाहिए क्योंकि परोपकारी भाव शैतान में नहीं होते .  सच्चे  इंसान में होता है जो   नर से नारायण बनाता है .
भागवान मान गया .
किसे .........?
देवीजी आपकी दयालुता को ....नन्द लाल भारती .. ०६.०७.2011