Friday, January 27, 2012

vigyapan

विज्ञापन .

हेल्लो ......लेखक .
जी बोल रहा हूँ .
आपका लेख अच्छा है ,अगले अंक में छापूंगा.
पत्रकार पवन khurpeewanee से.
कुछ  देर बाद दुसरे नंबर से आवाज़ बदलकर लेखक ...
जी पत्रकार महोदय बोलिए ..
विज्ञापन कहा से मिलेगा .......?
जी हेड आफिस से ......
लेख तुम लिख रहे हो विज्ञापन हेड आफिस से . तुम्हारी कंपनी में तो बहुत भ्रष्टाचार है.जनता का खून चूसने वाले तुम्हारी कंपनी का कला चिटठा मेरे पास है.
पवन पत्रकार हो या ब्लैक मेलर .मत छापना  लेख ,लेखक साहित्यकार है .इतना सुनते ही पत्रकार महोदय का मोबाईल कवरेज एरिया से बाहर हो गया...नन्दलाल भारती ...२७.०१.2012



Drug Trial

ड्रग ट्रायल
दर्द से कराहते हुए गीता बोली क्यों जी दवाई आज भी भूल गए क्या......?
कन्हैयालाल -कैसी बात कर रही हो भगवान् . कल हहर की बड़ी-बड़ी दुकानों का चक्कर लगाया पर नहीं मिली और आज डाक्टर खाजेड के पास गया वे नहीं दिए .
गीता-क्यों ..................?
अमित-मम्मी देखने की फीस, इंजेक्शन, इक्सर्सैएज के नाम पर लेने वाले आठ सौ से हजार रुपये का नुकशान जो था .
अनु - पापा दवाई नहीं देने का मतलब डरावना तो नहीं .
अमित- क्या कह रहा है ...?
अनु-भैया  ड्रग ट्रायल .................?
कन्हैयाबबू-क्या ये ड्रग ट्रायल शहर के कई लोगो को निगल चूका है.
पुष्पा-हे भगवान ड्रग ट्रायल करने वाले डाक्टर का नाश करना और  पूरे घर में सन्नाटा पसर गया......
नन्द लाल भारती ..२७.०१.२०१२





Thursday, December 22, 2011

man parivartan/short story


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uUnyky Hkkjrh 23-12-2011

Thursday, December 8, 2011

अमृतदान /लघुकथा

अमृतदान /लघुकथा
तुम्हारी सफलता का राज क्या है समय्पुत्र ?
कैसी सफलता ? देख रहे हो भेद,अत्याचार कैरियर बर्बाद कर चूका है तुम सफलता का नाम दे रहे हो.
शब्दब्रह्म तो शंखनाद कर रहे है .
कड़वे अनुभव दोस्त.......
क्या ......................?
हां ...कड़वे अनुभव के दर्द . इन्ही अनुभवों से जो सीख मिली है ,कड़वे अनुभवों के दर्द से उभरे शब्दब्रह्म  को शंखनाद का राज  मान सकते हो.
मतलब जहर पीकर अमृतदान ........नन्दलाल भारती ..०९.१२.2011


shesh

 शेष /लघुकथा
 यार तुम ऊपर तक लिखा पढ़ी क्यों नहीं kiye ?
गरीब  की कौन सुन रहा है. ऊपर वाले कहते है तुम काबिल नहीं हो .नौकरी चल रही क्या  यह कम है ?
अन्धो   के हाथ  रेवड़ी लग गयी     है तो  अपने  वालो  को  ही  पहचान  कर  देंगे  . काबिल को छिनना   आना  चाहिए  .
कैसे  छीन  सकता  हूँ अदना सिर्फ  योग्यता   के भरोसे , ना  छल  है न बल  है और नहीं दुसरे  साधन  .संतोष  और विश्वास की दौलत पास है और  आज के जमाने में इसकी जरुरत नहीं है .
देखना दमनकारी एक दिन तुम्हारी काबिलियत का लोहा मानेगे .
तब तक बहुत देर हो चुकी होगी , मर रहे सपने शेष न होगे तब दोस्त .....नन्द लाल भारती ०९.१२.2011
 
 

Monday, November 28, 2011

नफ़रत..

नफ़रत..
तकदीर का फैसला आया ?
नहीं जनाब...कैद तकदीर आज़ाद तो नहीं हुई .एक उम्मीद का धागा था टूट गया. 
मतलब उच्च-प्रबंधन ने तुम्हारी गुहार नहीं सुनी .
जी .... सर्वहारा की कौन  सुनता है . सुना गया होता  तो  हक़ मिला होता . आज कंडे से आंसू पोंछता.योग्यता का क़त्ल होता .भय,भूख,गरीबी का तांडव होता .सर्वहारा को मरते सपनों की शव यात्रा खुद के कंधे पर लेकर चलना होता .
मतलब तुम्हारे  कैरिअर के क़त्ल पर आखिरी  मोहर लग गयी .
क्या नसीब हो गयी है जनाब .
सच जख्म भर ही नहीं पा रहे है नफ़रत भरी दुनिया में . नन्द लाल भारती  २९.११.2011


 

Sunday, November 6, 2011

भ्रष्टाचार पर भाषण .

 भ्रष्टाचार पर भाषण .

रंजू के पापा कैसा  रहा भ्रष्टाचार पर भाषण .
कौन सा .
जिसके लिए दो दिन से तैयारी  कर रहे थे.  विभाग द्वारा आज   पांच नवम्बर को होटल के सभागार में पर संपन्न हुआ है  .
मुझे मौंका ही नहीं दिया गया .
क्यों ............?
छोटा कर्मचारी छोटी बिरादरी का आदमी, सामंतवादी विचार धारा के   अफसर  लोग मौंका नहीं दिए पर भाषण दूर तक जायेगा .
कैसे...........?
अभिव्यक्ति के और भी माध्यम है .
मतलब भाषण होकर रहेगा .
हाँ .............भ्रष्टाचार के विरोध में ललकार तो होनी चाहिए .आज के ज़माने में आवाज़ नहीं दबाई जा सकती .
आपका भाषण  भ्रष्टाचार पर भारी पड़े यही दुआ है .
धन्यवाद ........नन्द लाल भारती ..०७.११.2011