Saturday, January 5, 2013

उपाधि ==

उपाधि ==
चार मिस्ड कॉल देख कर दयानंद के कान कनकांये वह सारस्वत सम्मान के लिए मंच की और बढ़ने से पहले फोन घुमाया .
कहा हो ....सवाल बिजली सरीखे कड़का .....
उज्जैन.....
कैसे .....
छुट्टी पर .....
डाक्टर आफ फिलासफी का सारस्वत सम्मान लेने .
तुमने बिल क्यों भेज दिया .........?
भेजना था इसलिए .
क्यों .....
इंटर यूनिट के बिल थे .
दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा .
नहीं ...बिल्कुल  सही किया हूँ .
तुमको काम कहाँ आता है सब गलत करते हो .
सही काम को गलत ठहरा कर पोस्ट मार्टम क्यों कर रहे है ..............?
दोबारा ऐसे काम करोगे तो अनर्थ हो जायेगा .लौट कर आओ तो बताता हूँ .
पलकें गीली देखकर  डाक्टर आर के बोले क्या हुआ डाक्टर साहब ......?
बिग बॉस का फ़ोन थी .
बधाई दे रहे होगे .
नहीं ...पोस्ट मार्टम कर रहे थे .
शुभ अवसर पर पोस्ट मार्टम ..........
हमारे लिए है .विभाग बिग  बॉस और स्टाफ के लिए नहीं
क्यों .........
दलित -पद दलित .
पद अस्थायी है कद की श्रेष्ठता तो स्थायी और सूरज सम्मान होती है .
इतने में मंच से घोषणा हो गयी पुरुषोत्तम जी डाक्टर आफ फिलासफी का सारस्वत सम्मान कुलपति महोदय से प्राप्त आये .डाक्टर आफ फिलासफी सारस्वत सम्मान पुरुषोत्तम को मिलते ही दफ्तर के अधिकारी अजनवी और बेगाने हो गए .पुरुषोत्तम की ख़ुशी से दुखी होकर ...डाँ नन्द लाल भारती 05.01.2012 

Thursday, January 3, 2013

हैप्पी बर्थडे........

हैप्पी बर्थडे

नूतन वर्ष की मंगला कामनाएं .साल का पहला  दिन कैसा रहा ?
नव वर्ष आप के लिए मंगलकारी हो .नव वर्ष नव-नव जोश सब मंगलमय बस और क्या  खुशियाँ ही खुशियाँ .
एक जनवरी आपका जन्म दिन, सुअवसर पर बेटी के आने से ख़ुशी और बढ़ गयी .बहू के आने के बाद और बढ़ जाएगी .
डरा रही है क्या ..........?
वह भी तो किसी बाप की बेटी होगी खुशिया लेकर आएगी नए साल की तरह।आज तो आप दफ्तर में दुल्हे रहे होगे .
दुल्हा क्यों .......?
जन्म दिन भी तो आज है .बिटिया भी तो आपका जन्म दिन मनाने दिल्ली से आयी है .
दफ्तर के लोग पहले भे बेगाने थे अब तो और  बेगाने हो गए है .उन्हें कैसे याद रहेगा पद-दलित का जन्मदिन .
मिस्टर जैसवार हमें तो याद रहता है आपका जन्मदिन  एक जनवरी और बेटवा का  पंद्रह अगस्त .
धन्यवाद ......अपनो को तो याद रहेगा .
मिसेज जैसवार याद को तजा करोगे भी ...
मिस्टर जैसवार क्यों नहीं हाथ तो लगाओ .मिस्टर जैसवार और मिसेज जैसवार नयन बाबू को पुष्प गुच्छ थमाते हुए बोले जन्मदिन और नव वर्ष की हार्दिक मंगल कामनाये .नयन बाबू की आँखे बेमौसम बरस पड़े .नयन बाबु पलकें निचोड़ते हुए बोले जिन लोगो की बीच जीवन मधुमास गंवाते हुए 50 साल की उम्र पूरी कर लिया वे अनजान और बेगाने बने रहे एक मिस्टर जैसवार और मिसेज जैसवार।इतने में मिसेज नयन बोली ये है मानवीय रिश्ता ...हैप्पी बर्थडे अंजन के पापा .......डाँ नन्द लाल भारती 03.01.2013


Monday, October 15, 2012

अपमान और धोखा /लघुकथा

अपमान और  धोखा /लघुकथा 
बिग बॉस -तुमको मालूम है सब दफ्तर का सब काम आन लाइन हो गया है .
मोहन-जी .
बिग बॉस-सब काम तुम्हे ही करना है .
मोहन-नौकरी करना है तो काम तो करना ही होगा पर प्राधिकृत ड्यूटी के दायरे में।
बिग बॉस -दायरे तोड़ना होगा .
मोहन-गरीब को लाभ क्या .....?
बिग बॉस -तनख्वाह तो मिल रही है .
मोहन-तनख्वाह तो उनको भी मिल रही है तो करह बजे के बाद आते है हो हल्ला करते है चले जाते है .
बिग बॉस-काम मुझे करना है किससे कौन काम लेना है मुझे तय करना  है  तुमको नहीं .
मोहन-कैडर बदल दीजिये  ड्यूटी चार्ट बदल जायेगा ....
बिग बॉस -ये तो नहीं हो सकता ..
मोहन-आँख में धुल झोंक कर काम करवाया जा सकता है बिना किसी लाभ के .
बिग बॉस- नौकरी करना है तो सब करना होगा .दूसरे के काम भी .
मोहन-ये तो कमजोर का शोषण है.कमजोर को आंसू देकर अपनी सीट के काम के साथ दूसरे की सीट का कम करवाना स्व-जातीय को मनचाही छूट भरपूर आर्थिक लाभ पहुचना श्रम का अपमान है और संस्था के साथ धोखा ....नन्द लाल भारती ..16.10.2012

Thursday, October 11, 2012

समीक्षा /लघुकथा

समीक्षा /लघुकथा
समीक्षा बैठक की हवाई यात्रा से लौटने के तुरन्त बाद ऑफिस हेड साहब ने स्टाफ की मीटिंग बुला लिए बढ़ाई और प्रशंसा की खूब बौझार किये .बिग बॉस की प्रसन्नता के जिक्र किये.विभाग के मुनाफे और डिविडेंड पर चर्चा हुई -कार्य योजना पर विमर्श हुआ . आखिर में हेड साहब बोले बिग बॉस ने टी ए बिल की समीक्षा  में पाया की दुखी राम को लाभ पहुचाया जा रहा है .बिग बॉस ने तुरंत दौरे न करने के निर्देश दिए है।
दुखी राम -काम ........?
हेड साहब -काम तो करना पड़ेगा .
दुखीराम-मेरा हजार पंद्रह सौ का टी ए बिल अधिक हो  गया है कागजी घोडा दौड़ा कर  बीस से अधिक हजार वालो की समीक्षा नहीं हुई क्या .....?
भिभेख मुंह लगु अफसर -तुम्हारी दूसरे अधिकारियो से क्या तुलना .बिग बॉस ने कुछ सोच समझ कर डिसीजन लिया होगा .
दुखीराम - डिसीजन कही जातीय उत्पीडन का डँवरुआ तो नहीं .......नन्द लाल भारती ....12..10.2012

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Thursday, August 30, 2012

बैंक एकाउंट /लघुकथा

बैंक एकाउंट /लघुकथा गीता-सुदेश के पापा लोन  तो मिल जायेगा ना.........?
श्याम-उम्मीद तो है पर..........
गीता -पर क्या .......?
श्याम-बैंक एकाउंट तो खुल जाए |
गीता-
बैंक एकाउंट  खुलने में अड़चन आ रही है क्या ..?
श्याम-हां |
गीता-क्यों ...? सब तो आपके नाम है - बिजली कनेक्शन,पैन कार्ड ,वोटर आईडी और क्या चाहिए ?
श्याम-ये सब तो है पर   विटनेस नहीं है |
गीता -क्या ये दस्तावेज कम है
बैंक एकाउंट खोलने के लिए ........?
श्याम-कम है  ना तभी तो बैंक वाले नहीं मान रहे ?
गीता -आतंकवादियों के खाते खुल जाते हैं, पासपोर्ट बन जाते है अरबो का लेनदेन हो जाता है, विदेश बैंको के खजाने भरे जा  चुके  है| आम आदमी का बैंक एकाउंट नहीं खुल पा रहा है 
वाह रे सरकारी कानून कायदे और पालन करवाने वाले लोग ......?
नन्द लाल भारती
३१.०८.2012




Sunday, August 5, 2012

ख़ामोशी (लघुकथा )

ख़ामोशी (लघुकथा )
अधिकारी और दो सहायक अधिकारीयों ने  दो लाइन के वाक्यविन्यास का पोस्टमार्टम ऐसे किये जैसे कोई भाषा वैज्ञानिक | आखिर में अधिकारी के अंगुली सयाजी पर थम गयी |
अधिकारी शायाजी और सयाजी लिखाकर पूछी ज्ञानप्रकाश कौन सही है ?
ज्ञानप्रकाश -सयाजी ...........
अधिकारी -तुमने लिखा है इसलिए ?
ज्ञानप्रकाश -नहीं, सही को सही कह रहा हूँ | बिते ज़माने में सयाजी एक राजा थे उनके नाम पर संसथान है |
ज्ञानप्रकाश का सच अधिकारियो के अभिमान पर जैसे चोट कर गया| ज्ञानप्रकाश का ज्ञान उन्हें गुस्ताखी लग रही थी |ज्ञान प्रकाश बेख़ौफ़ बोला गुस्ताकही माफ़,छोटा कर्मचारी ज्ञानवान  हो सकता है | उसे सही गलत की समझ हो सकती है| ज्ञानप्रकाश की बात सुनते ही कुछ पल के लिए  पसर गयी खामोशी...........
नन्द लाल भारती ...०५.०८.२०१२