Monday, October 5, 2015

खबर /लघुकथा

खबर  /लघुकथा 
व्हाटएप्प्स से खबर लगी है कि तुम्हारा एक्सीडेंट हो गया है। 
जी सही खबर   है। शुक्र है फ्रैक्चर नहीं हुआ है,शरीर के ढांचे में दर्दनाक अंदरुनी घाव है। आप मित्रो की दुआओ से जान बच गई है। 
क्या कह रहे हो ?
सच कह रहा हूँ कोई बेवकूफ सड़क पर कार का दरवाजा खोल दे तो क्या होगा ?
यार सुनकर रूह काँप उठी। ना जाने लोगो को कौन सी जल्दी रहती है कि राह चलते लोगो की जान लेने पर तूले रहते है। 
हेलमेट से काफी राहत हो गयी बचाव हो  पर पूरा अस्थि पंजर हिल गया है, पूरे  बदन  में भयावह दर्द है भाई। 
मुसीबत टल गयी। दवा लो,आराम करो दर्द भी ठीक हो जायेगा। 
वही हो रहा है,पर  आप मित्रजनों -स्वजनों की दुआ अधिक असरकारी है। 
वह कैसे बुध्दनाथ ?
मौत जो छूकर चली गयी विजय बाबू।  
डॉ नन्द लाल भारती
23 .09 .2015

Friday, September 18, 2015

सुनामी /लघुकथा

सुनामी /लघुकथा 
रोहनबाबू ड्योढ़ी के बाहर जूता निकाल कर पाँव रगड़ते हुए कमरे में दाखिल होते ही कुर्सी में अंदर तक धंस गये.रोहनबाबू को चिंतित देखकर  धन्वन्ति सिर पर हाथ फिराते हुए पूछ बैठी - करन के पापा दफ्तर में किसी से कुछ कहा सुनी हो गयी क्या ?
नहीं भागवान । 
फिर ये सौत का आतंक क्यों ?
कैसी सौत ?
आपकी चिंता किसी सौत से कम है क्या ? चिंता का कारण  क्या है प्राणनाथ ?
एक महिला । 
कहाँ गयी बदचलन औरत ?
कालोनी के नुक्कड़ पर । 
कहाँ की थी ?
आसपास की के किसी कालोनी की रही होगी । यह  महिला  चिंता का कारण कैसे हो गयी ।  कालोनी का प्रवेश अतिक्रमण का शिकार है,दबंगो का कब्ज़ा है। मुख्य सड़क सकरी गली जैसी हो गयी है| सुबह शाम जाम लग जाता है| अभी यही हाल था । अपनी गाड़ी एक तरफ किनारे खड़ी थी । एक महिला एक्टिवा से   आयी मेरी गाड़ी में टक्कर मार दी ,इसके बाद भी मेरे ऊपर चिल्लाने लगी,अंधे हो क्या ,अपनी औकात में रहा करो और ना जाने क्या ?
हमने बोला मैडम खड़ी गाड़ी में टक्कर मार दिया,हजारो का मेरा नुकशान कर  दिया,यह तो वही हाल हुआ उलटा चोर कोतवाल को डांटे | इतना सुनते ही मोहतरमा  द्रुतगति से भाग निकली। 
मिठाई की दुकान वाला मोदक तौलते हुए बोला बाप रे औरत है कि सुनामी।
धन्वन्ति बोली-चिंता छोडो करन के पापा सुनामी निकल गयी|ॉ
डॉ नन्द लाल भारती
18.09 .2015

Sunday, September 6, 2015

निरुत्तर /लघुकथा

निरुत्तर /लघुकथा 
लम्बा टीका और शरीर पर गेरुआ वस्त्र लपेटे ज्योतिषी ने अपनी कई भविष्य वाणियों को सत्य साबित कर विश्वास की पकड़ मजबूत बनाये जा रहे थे। इसी बीच एक व्यक्ति ने नाम के साथ उपनाम लगाये जाने के मुद्दे पर सवाल कर दिया। ज्योतिषी सवाल के जबाब में बोले उपनाम व्यक्ति कुल वंश और गोत्र के परिचायक होते है ।
दूसरा व्यक्ति बोला गलत । 
तीसरा बोला व्यक्ति के स्व अभिमान और अन्धविश्वास को बढ़ावा है और कुछ नहीं । उपनाम का चलन ख़त्म चाहिए । 
ज्योतिषी बोले क्या ज़माना आ गया है लोग कुल वंश को ख़त्म करना चाहते है ।
चौथा व्यक्ति बोला ज्योतिषी महोदय मत नाराज होइए, सोचिये और श्री कृष्णा का यादव उपनाम नहीं था श्री राम जिन्हे मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है उनका उपनाम सिंह नहीं था । उपनाम का दौर व्यक्ति के स्व अभिमान और अन्धविश्वास को बढ़ावा नहीं तो और क्या है ……?
निरुत्तर तथाकथित ज्योतिषी ने बस्ता समेट कर नौ दो ग्यारह हो लिए |
डॉ नन्द लाल भारती
06 .09 .2015

जय-जयकार /लघुकथा

जय-जयकार /लघुकथा 
पंद्रह अगस्त के जश्न के सुअवसर पर आयोजित वक्तव्य कार्यक्रम में गेरुआ धोती, कुर्ता और टोपीधारी   प्रथम वक्ता अपने वक्तव्य की शुरुआत कर्मकांडी श्लोको से कर  आज़ादी का  सेहरा हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वंय सेवक के सिर पर बाँध कर गौरान्वित महसूर कर रहे  थे परन्तु बेखबर  श्रोता जैसे कानो  में  अंगुली डाले बैठे थे । इस चुप को तोड़ते हुए उच्चवर्णिक जर्नलिस्ट  कन्या ताल ठोकते हुए  बोली वक्ता महोदय आज़ादी की जंग   पूरे भारत ने जाति धर्म से ऊपर उठकर लड़ी थी तभी देश आज़ाद हो पाया वरना देश का क्या हाल होता ? वक्ता  महोदय आपका कथन आज़ादी के दीवानो अमर शहीदो का अपमान है।सर्वधर्म और समभाव को आहत करता है], बहुत हो गया अब जाति-धर्म के नाम पर बंटवारा ,आज की  युवा पीढ़ी बहकावे में नहीं आने वाली है, आज की पीढ़ी को   समतावादी समाज और सर्व संपन्न देश चाहिए जाति धर्म के नाम जहर उगलता  भेदभाव  नहीं । इतना सुनते ही जर्नलिस्ट कन्या की जय-जयकार होने लगी।   डॉ नन्द लाल भारती
26.08.2015

Sunday, August 23, 2015

आधुनिक भिखारी/लघुकथा

आधुनिक भिखारी/लघुकथा 
हेलो अंकल ....... अंकल …हेलो आंटी … हेलो आंटी … बार की आवाज़ सुनकर बबलू सिर खुजलाते हुए बाहरी गेट की ओर बढ़ा। 
बबलू को देखकर आगंतुक नवयुवक बोला हेलो ब्रदर। 
बबलू-बोलिये क्या काम है? मम्मी यज्ञ-हवन कर रही है ,पापा ध्यान । 
नवयुवक-घर क्या ये तो मंदिर हो गया ?
बबलू-पापा छत्तीस करोड़ देवी- देवता में विश्वास नहीं करते,मम्मी कर लेती है । आपको पापा से काम है या मम्मी से ?
अब तो आपसे ही है ब्रदर ।
क्या मतलब बबलू चमक कर बोला ?
अरे ब्रदर घबरा क्यों रहे हो आज नागपंचमी है ।
तो मै करुँ ?
कुछ दान कर दो नवयुवक बोला ।
पढ़े लिखे होकर भीख मांग रहे हो,कुछ तो शर्म करो ?
ब्रदर -पूजा पाठ करना, दान लेना पुश्तैनी काम है नवयुवक बोला ।
अपात्र भिखारी को दान देना पाप है और कानूनी जुर्म भी ।
इतने में नयन बाबू बोले कौन है बबलू बेटा ?
बबलू गेट बंद करते हुए बोला आधुनिक भिखारी ।
डॉ नन्द लाल भारती 20 .08 .2015

Tuesday, July 28, 2015

दर्शन /लघुकथा

दर्शन /लघुकथा 
बाबा बहुत थके मांदे लग रहे हो,कहाँ से आ रहे हो  ?
बेटा  दर्शन करने गया था। 
कब से जा रहे हो बाबा ?
बचपन से। 
दर्शन कभी हुआ ?
किसी को नहीं हुआ तो हमें कहाँ होगा ?
बाबा मेहनत की कमाई क्यों बर्बाद कर रहे हो ?पुजारियों को घुस देते हो ,चढ़ावा चढ़ाते हो ,दानपेटी में भी डालते हो,वी आई पी दर्शन भी कर लेते हो ,इसके बाद भी कह रहे दर्शन नहीं हुए। बाबा होगे भी नहीं। 
क्या कह रहे हो बेटा। 
बाबा जरा सोचो। 
क्या .........? 
पत्थर की मूर्ति,लोहे का दरवाजा,हट्टे -कट्टे  पूजापाठ करवाने वाले  वंशागत  ठेकेदार ,क्या ऐसी कैद में भगवान के दर्शन हो सकते है बाबा ?
तुम्ही बताओ बेटा ।
बाबा जातिपाति की रार से ऊपर उठकर  दीन-दुखियो की सेवा करो,भूखो को रोटी ,वस्त्रहीन को वस्त्र दो, यही ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि है,इनकी सेवा  ईश्वर की पूजा  है।  
बेटा तुमने तो मेरी आँख खोल दी। अब दीन-दुखियो की आँखों में ईश्वर के दर्शन करूँगा। 
बाबा जरूर होगा। डॉ नन्द लाल भारती 04 .07.2015  

नाक /लघुकथा

नाक /लघुकथा 
पिता को दिन प्रतिदिन चिंता की चिता में सुलगता देखकर नयना  हिम्मत जुटा कर पिता से पूछ बैठी। पिताजी आपकी चिंता का कारण कही मैं तो नहीं ?
बेटी  क्यूँ  और कैसी चिंता ?भला चिंता का कारण तू क्यों हो सकती है बेटा ? 
ब्याह के  दहेज़ की चिंता पिताजी । 
कौन करेगा मैं नहीं करूँगा तो । सुयोग जाति पूत वर मिल जाता है तो तेरी डोली उठाकर सीधे गंगा स्नानं को जाऊँगा । 
ब्याह से ज्यादा दहेज़ दानव की चिंता है ना  ? पिताजी एक एहसान कर दीजिये मुझ पर । 
कैसा एहसान बेटा ?
जाति पूत को सौंप कर गंगा स्नान की जिद का पिताजी । 
ज्यादा पढ़-लिख गयी तो अपने बाप की नाक कटवायेगी क्या ?
खूंटे से  बंधी गाय नहीं ……नाक और ऊँची होगी पापा । 
कैसे  ऊँची होगी ?
उच्च शिक्षित अमीर चतुर्थ वर्णिक लडके से ब्याह कर । 
घोर कलयुग आ गया प्रथम वर्णिक लड़की चतुर्थ वर्णिक लडके से ब्याह । 
हां पापा नयना  बोली।  
ना बेटी ना ऐसा अधर्म ना करना । 
पापा इससे दो समस्याओ का अंत होगा  । 
कौन सी समस्या का अंत करने जा रही है ।
पापा..........दहेज़ दानव और जातिवाद का । 
आख़िरकार नयना अपने मकसद में कामयाब हो गयी । ब्याह के दिन  स्व-रूचि भोज का आनंद लेते हुए लोग बड़े चाव से चबा -चबा कर बतिया रहे थे ,लो जी वह दिन भी आ गया दीवार खड़ी करने वाले ही  तोड़ने लगे। अब तो  देश की नाक दुनिया में ऊँची हो जाएगी ।  
डॉ नन्द लाल भारती 16 .07.2015